Monday, 28 October 2013

हमे उम्मीद भी उतनी ही लगानी चाहिए जितना हम दूसरों के लिए कर सकते है ---

जो इंसान अपने समाज और अपने परिवार के लिए बहुत ज़्यादा कार्य करते है उनसे अपेक्षा भी बहुत ज़्यादा होती है | वो इंसान तब जितना भी करे हमे कम ही लगता है | सच कहे तो दूसरों से हमे उम्मीद भी उतनी ही लगानी चाहिए जितना हम दूसरों के लिए कर सकते है | कोई अगर अपने समाज और अपने परिवार के लिए बहुत कुछ कर रहा है , तो हमे इतना तो समझना ही चाहिए की आखिरकार वो भी एक इंसान है उसकी भी अपनी कोई इच्छा हो सकती है और उसके भी कार्य करने का एक दायरा हो सकता है | जो असल में हमारे लिए कार्य करता है कहीं न कहीं हम उसे यंत्र की तरह इस्तेमाल करते है उसकी भावनाओं की कदर भी नहीं करते | बस यह सोचते है की उम्र भर यह इंसान बस हमारे लिए कुछ करता ही रहे | और कभी अगर वो इंसान अपनी कोई इच्छा जाहीर करता है हमारे सामने तब उसकी इच्छा हम सबको नाजायज लगने लगती है क्योंकि हमे यह लगता है यह इंसान तो समाज और अपने परिवार का बोझ उठाने के लिए बना है इसकी अपनी कोई इच्छा नहीं होनी चाहिए | हम सिर्फ अपनी ख़ुशी और स्वार्थ के कारण दूसरे की खुशी को अनदेखा करते है | जो हमारे लिए जीवन भर अपना सबकुछ दे कर करता है हम उनके खुशी लिए थोड़ा सा समझौता नहीं कर सकते वहाँ भी हम सिर्फ अपनी सुख-सुविधा की ही चिंता करते है | अगर वो कोई छोटी सी भी गलती कर दे तो उसकी वो गलती मृत्युदंड देने लायक होता है | देखा जाए तो हम इंसान को इंसान समझते ही नहीं | सिर्फ आस लगाते फिरते है दूसरों से और जब खुद की करने की बारी आती है तब वहाँ से पलट जाते है और सामनेवाले की गलतियाँ गिनवाते फिरते है | कहीं न कहीं हम इंसान अपने अहंकार , अपने ज़िद्द अपने अभिमान को बरकरार रखने के लिए हमेशा दूसरों के भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते है और हम इंसान को इस्तेमाल कर के छोड़ देते है |

1 comment:

  1. लोगों के अन्दर आत्मावलोकन की कमी है ।।

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