Thursday, 3 October 2013

जीवन में आगे बढ़ने के लिए किसी की गलतियों को भूल कर इंसान का साथ दीजिये ---

हर इंसान चाहता है की वो जब निराशा (Depression) में रहे , तब उसका साथ खास कर उसके घर वाले और उनके अपने (अभिभावक / माता-पिता / दोस्त ) ज़रूर दे | Depression एक ऐसी चीज़ है जहां इंसान अत्महत्या तक करने के लिए सोचता है और कई लोग कर भी लेते हैं | ज़्यादातर लोगों को गलत चीजों की लत तब गलती है जब वे Depression में रहते हैं | क्योंकि लोगों को गलती करने के बाद यह एहसास होता है कि अब उनका साथ कोई नहीं देगा , उनके लिए कोई नहीं है और उनका जीवन बेकार बन चुका है | कोई भी साधारण इंसान गलत करनेवाले का साथ छोड़ देता है क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसके चरित्र पर कोई दाग लगे और उसका जीवन साफ रहे | लेकिन यह चीज़ किस हद तक सही है हम कैसे जिम्मेदार नागरिक है कि एक इंसान अगर गलती करे तो उसको समझने और उसके भविष्य के जीवन को सुधारने की जगह हम उसका साथ छोड़ देते हैं ! मेरी व्यक्तिगत राय यह है कि हमे इतना अच्छा चरित्र रख कर कोई फाइदा नहीं कि हम किसी के जीवन को सँवारने के काम ही ना आ पायें | हमारे आस-पास अगर कोई भी ऐसा इंसान हो जिसका थोड़ा सा साथ देने से उसका जीवन सुधर जाए तो उसका साथ हम सबको ज़रूर देना चाहिए | ऐसे किसी की भी सहायता कर के देखिये ,  मन को ज़रूर शांति मिलेगी क्योंकि आप उस इंसान के काम आ रहे हैं जिसको सच में आपकी ज़रूरत है |


तीन दिन पहले मेरे एक दोस्त के भाई ने अत्महत्या करने की कोशिश की सिर्फ इसलिए क्योंकि वो Depression में था | उसने कुछ गलती कर दी थी | लेकिन मेरे खयाल से वो गलती  कोई बहुत बड़ा जुर्म नहीं था | उसे बहुत अच्छे से प्यार दे कर समझाया जा सकता था | उसके अभिभावक ने उसे नहीं समझाया हर बात पर डांटा और उसके साथ मार पीट की | कोई भी अगर गलती करता है या कर रहा है तो सबसे पहले हमारा फर्ज़ बनता है उसे समझानानाकि ताना मारना और गालीगलौज करना | जब किसी को अपनी गलतियों का अहसास  होता है तब वो इंसान यही चाहता है कि कोई उसे समझे , उसे जीवन में आगे बढ़ने में साथ दे , नाकि  हमेशा उसकी गलती का एहसास करबाकर उसे पीछे धकेल दे | कई लोग अपनी गलती का सुधार सिर्फ इसलिए नहीं कर पाते क्योंकि उनका साथ देने के लिए कोई नहीं होता है | तब वो इंसान इतना अकेला पड़ जाता है कि वो एक के बाद एक गलती करते ही जाता है और उसे नशे जैसे चीजों की लत लग जाती है | यहाँ पर हमारा समाज बहुत हद तक जिम्मेदार है कि हम एक गलत इंसान को अपनाना नहीं चाहते उसे सुधारना नहीं चाहते | हम हमेशा ऐसे अच्छे लोगों से घिरे रहना पसंद करते हैं , जिस अच्छाई का कोई वजूद ही नहीं है | एक-दो गलती से इंसान का जीवन खतम नहीं हो जाता | हम इंसान हैं गलतियाँ करते हैं फिर सीखते हैं और एक नयी राह की ओर फिर कदम बढ़ाते हैं |

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार - 04/10/2013 को
    कण कण में बसी है माँ
    - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः29
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  2. बहुत सार्थक लेखन |
    वैसे इस बात पर मैंने लेखो की एक श्रृंखला "तनाव"लेबल के तहत लिखा हैं |
    मेरे ब्लॉग से पढ़ा जा सकता हैं |
    ***********************
    लिली जी आप हमेशा से बहुत महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरी पोस्ट लिखती हैं ,फेसबुक पर आपको वर्षों से पढता आ रहा हूँ |
    डॉ अजय
    “अजेय-असीम{Unlimited Potential}”

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    1. धन्यवाद जी आपका ... :)

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