Monday, 20 May 2013

मैं लोकतंत्र हूँ __
आज मेरा वजूद ही असपष्ट है और भ्रष्ट फंदे में फंसा हुया है |
जहां प्यादे रात दिन मेरा सौदा और हिस्सेदारी का तंत्र करते है |

हाँ मैं वही लोकतंत्र हूँ ___
जहां मेरे ही रखवाले मेरे ही नाम से आम जनता को लूटते है |
मेरी अस्मिता को नासूर बना कर अपनी सत्ता सम्हालते है | - लिली कर्मकार

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