Tuesday, 12 February 2013

यहाँ ज़िन्दा कौन है .... ! 

यह तो है .... 
चलती फिरती लाशों का शहर है ... ! 

जहां दिल तो है लेकिन धड़कन नहीं है .... 
जहां अपने तो है लेकिन अपनापन नहीं है ... । - लिली कर्मकार

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