Monday, 14 January 2013

कुछ क्षण , अन्तर्मन में कुछ सवाल उठाते हैं 
अकेले इस जहाँ में किधर जाए कौन साथ निभाए !

इस भागती दुनिया में मंजिल की तलाश में
अनजानी राहों पर मेरे हाथों को मेरा वजूद थाम लेता है !

अकेली हूँ लेकिन हारी हुयी नहीं ...
अभी भी मुझे उठना है दौड़ना है इस जहाँ को जितना है ! - लिली कर्मकार

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