Friday, 28 September 2012

दरिया पार  

प्यार की तिनके की वफ़ा  

न जाने किस मोड़ पर टूट जाता है ...  !  


तनहाई में  

अक्सर दिल टूट सा जाता है ...  

करके वफ़ा वादा ...  

अक्सर लोग बेवफ़ा हो जाते है ...  !


यह रिश्ते , यह सपने ...  

बस होते है शीशे के समान ...  

किसी को नहीं पता कहाँ टूट जाता है ... !    


हर एक मोड़ पे ...          

दिल में अजीब सा ख्वाहिशों  का मेला है ...  

फूलों के छाँव में काटों के भी रास्ते है ... ! – लिलि कर्मकार 

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