Friday, 31 August 2012

राधा रानी जी का नाम ही एक महा मंत्र है॥ संतों ने राधा रानी जी के बारे में कहा है की -

" जाको न मंत्रों महा जो स्वतंत्र "

राधा में 'रा' धातु के बहुत से अर्थ होते हैं॥ भागवत में इसके बारे में लिखा हैं की जिससे समस्त कामनायेँ, कृष्णा को पाने की कामना तक ही सिद्ध होती है॥

राधा शब्द से न जाने कितने जन्मों के पाप नष्ट होते हैं ॥

'र' वर्ण का अर्थ है - जन्म-जन्मांतर के पापों के नाश ॥
'आ' वर्ण का अर्थ है - मृत्यु, गर्भावास, आयु हानी से छुटकारा ॥
'ध' वर्ण का अर्थ है - श्याम से मिलन ॥
'आ' वर्ण का अर्थ है - सभी वन्धनों से छुटकारा ॥
" जय जय श्री राधे "
 


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