Friday, 31 August 2012

देखो इस ‘ लड़के ‘ को 
कितना ‘ मासूम ‘ है … । 
‘ आखों ‘ में भी कितनी ‘ नमी ‘ है …| 
लेकिन उसकी ‘ मासूमियत ‘ के 
पीछे छुपे ‘ दर्द ‘ कोई नहीं जानता ….| 

वो चले जा रहा है ……..
इस दुनिया के “ भीड़ से भरी “
एक ‘ सड़क ‘ के किनारे से ....।
सब ‘ देख ‘ के भी , ‘ अनदेखा ‘ करते है ....
इस दुनिया में ‘ कोई ‘ नहीं है
उसे ‘ कुछ ‘ भी ‘ पुछने ‘ के लिए .....

वो ‘ दिल ‘ ही क्या जो
दूसरों के ‘ दर्द ‘ में न ‘ दुखे ‘ ...
वो ‘ दिल ‘ ही क्या
जिस ‘ दिल ‘ से किसी के लिए
‘ दुआ ‘ न निकले .... ।

‘ बेदर्द ‘ इस ‘ दुनिया ‘ में कोई
किसी का ‘ दर्द ‘ नहीं समझता ...
कोई किसी का ‘ साथ ‘ नहीं देता ...

वो ‘ लड़का ‘ भी किसी दिन …….
ऐसे ही ‘ दुनिया ‘ से चला जाएगा ... ।
कोई भी नहीं रहेगा
‘ एक बूंद ‘ आसू बहाने के लिए .....
ऐसे ही मीट जाएगा उसका ‘ निशान ‘ ....
कोई क्या ‘ याद ‘ भी करेगा कभी .....
इस “ मासूम से चेहरे “ को .....! - लिलि कर्मकार

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