Thursday, 30 August 2012

माद्रक द्रव्यों का बढ़ता हुआ प्रयोग :- आज़ादी की प्राप्ति के बाद भारत किस प्रकार का देश बने यह भरतवासियों की प्रमुख चिंता थी॥ इस संबंध में गांधी जी ने कल्पना की थी की वो मादक द्रव्यों से रहित देश होगा॥ परंतु आज़ादी के बाद से आज तक शराब का प्रयोग बढ़ता गया है॥ भारत के बहुत से हिस्सों में शराब (अल्कोहल) का प्रयोग उसकी आबादी का 20 से 40 प्रतिशत लोग कर रहे हैं॥ कुछ 
ग्रामीण क्षेत्रों में शराब का प्रयोग 70 प्रतिशत लोग कर रहे हैं॥ ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में शराब एवं मादक द्रव्यों के बढ़ रहे प्रयोग की मुख्य वजह है गरीबी से उत्पन्न परेशानियाँ एवं दबाव॥ इसके दुसरे कारण हैं अशिक्षा, परीक्षाओं एवं जांजों से उत्पन्न भय तथा यह गलत अवधारणा की शराब का प्रयोग स्वस्थ्य के लिये अच्छा है॥ मादक द्रव्यों के प्रयोग से अल्पकालिक प्रसन्नता का भ्रम होता है और वे अपनी गरीबी के बारे में भूल जाते हैं॥ शराब के प्रयोग से मनुष्य आत्म नियंत्रण खोने लगता है और उसके व्यवहार में हिंसा प्रकट होने लगती है॥ घरेलू हिंसा का मुख्य कारण है शराब का प्रयोग॥ इसके अत्यंत खतरनाक परिणाम निकलते हैं क्युओंकि शराब का प्रयोग करने वाला व्यक्ति अगर पूर्णत: नहीं तो अपनी कमाई का अधिकतम हिस्सा सस्ते शराब के लिये ही खर्च कर देता है तथा उसके परिवार और पत्नी के लिये थोड़े से ही रूपये बचते हैं॥ येसी परिस्थिति में घर कि महिला को पैसे कमाने के लिये नौकरी करनी पड़ती है जंहा उसे कम वेतन मिलता है॥ सामाजिक दुष्परिणामों के बावजूद भी राज्य शराब का उत्पादन एवं बिक्री राजस्व (धन) के रूप में आय के लिये करता है॥ मद्द निषेध को लागू करने वाली संस्थाएं भी शराब कि अवैध बिक्री के सम्बन्ध में आँखें बंद करना बेहतर समझती है॥ मद्द निषेध को अब समाप्त किया जा रहा है॥

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