Wednesday, 7 May 2014

दंगो जैसे भयावह त्रासिदी

दंगो जैसे भयावह त्रासिदी जिस भी इंसान ने स्वयं देखी होगी वह मानवता के नाते कभी दंगो का समर्थन नहीं कर सकता वास्तविक रूप से देखा जाए तो दंगे किसी के बीच भी हों उनमे सबसे पहले मरना इंसानियत को पड़ता है | मैं स्वयं आसाम में रहती हूँ मैने अपने जीवन में दंगो की विनाशलीला को देखा है | न जाने कितने इंसान के बच्चों को अनाथ होते देखा है इसलिए मैं कभी भी उन लोगों का समर्थन नहीं कर सकती जो हिंसा और दंगो को करवाने में यकीन रखते है या दंगो और लाशों की राजनीति करके वाह वाही लूटना चाहते है | ऐसे लोग बिना विवाद किये मेरी लिस्ट से जा सकते है जिनमे इंसानियत नाम की धारणा का आभाव है क्योंकि आंख के बदले आँख के सिद्धांत अगर सभी अपना लें तो एक दिन सारी दुनियाँ अंधी हो जायेगी ||

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