Friday, 7 March 2014

प्यार तो बस प्यार होता हैं

प्यार तो बस प्यार होता हैं ।

यह ज़रूरी नहीं है कि हमें अगर किसी से प्यार है
, तो सामने वाले को भी हमसे प्यार हो। लेकिन मन को कौन समझाए ? मन हमेशा ही बग़ावत पे उतारू रहता है, कि हम जिससे प्यार करते हैं, वो भी हमसे प्यार करे।

अगर नहीं करता है, तो हम बदनाम करना और बुरा भला कहना शुरू कर देते हैं। लेकिन हम अगर किसी से सच्चे मन से प्यार कारते हैं, तो ''प्यार की जगह नफरत नहीं ले सकती है''
हर इंसान को अपने लिए क्या सही है और उसकी किस चीज़ में भलाई है यह सोचने का पूरा हक़ है और वह स्वतंत्र भी है। हम उस इंसान के लायक नहीं भी हो सकते है, हमें अपनी ज़मीन पता होनी चाहिए।

जबरदस्ती और किसी के मन में डर पैदा कर के हम किसी इंसान का प्यार नहीं पा सकते। अगर हमें किसी से प्यार है तो उसे मुक्त छोड़ना चाहिए अगर हमारा है तो हमारा ही रहेगा।

बस सामनेवाला हमें चाहे या ना चाहे हम तो उसे जीवन भर निःस्वार्थ हो कर प्यार कर ही सकते हैं। उस पर कोई रोक नहीं लगा सकता और यह हमारा हक़ भी बनता है। क्योंकि तब बात सिर्फ हमारे दिलों दिमाग की होती है। वहां किसी के मन को हमसे ठेस पहुँचने की कोई शंका नहीं रहती।

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