Sunday, 15 September 2013

बहुत फैल गया था अंधेरा चारों ओर |

बहुत फैल गया था अंधेरा चारों ओर |
डरती थी की मेरे छाये को ही मुझसे घुटन तो नहीं होती ?
आज अचानक से अंधेरे में  
उजाले की किरण मन को एक नयी दिशा दे गयी |  

पीछे मुड़ का भी देखा अतीत का कोई मायाजाल तो नहीं !
ना
, सब बीती बातें फीकी पर गयी आज नए जीवन के आगे |

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