Friday, 18 January 2013

अभी तो वक़्त है पुरुषार्थ के ओर बढ़ने का 
और अपने लक्ष को प्राप्त करने का । 

अब न डर है किसी भी अँधियारे से ... 
अब निर्भीक हो कर सत्य का सामना हो । 

अब तो साहसी बन उजाले की ओर बढ़ना है हमे । 
अब तो वक़्त है सांझ को अनुभव करने का
अपने अंदर के देवों को जगाने का ... ! 

अब वक़्त है विषय-आसक्ति त्याग का ... 
सिर्फ समय है अब परम लक्ष्य प्राप्ति का । - लिली कर्मकार

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