Thursday, 29 November 2012

राजीव जी आप हमेशा हमारे दिलों में राज करेंगे ... 
आप नहीं है लेकिन आपके विचार हमेशा ही हमारे अंदर जीवित रहेंगे ... ! 

अपने एक विचार दिया था “ राष्ट्रीय भाषा को अपनाना है और हमे अपनी खुद की स्वदेशी पहचान को लेकर आगे बढ़ना है ” ... मैं यहाँ पर बोलना चाहूंगी अगर आज में हिन्दी बोल रही और लिख रही हूँ यह सिर्फ और सिर्फ आपकी ही प्रेरणा से ... नहीं तो मैं शायद आज विदेशी भाषा और चीजों में ही कहीं खो जाती । 

आज आपका जन्मदिवस है और पुण्यतिथी भी ... लेकिन आप आज भी हमारे लिए ज़िंदा ह
ै और हमेशा ही रहेंगे ... ।

राजीव दीक्षित - (30 नवम्बर 1967 - 30 नवम्बर 2010) एक भारतीय वैज्ञानिक,प्रखर वक्ता और आजादी बचाओ आन्दोलन के संस्थापक थे। वे भारत के विभिन्न भागों में विगत बीस वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के विरुद्ध जन जागरण अभियान चलाते रहे । आर्थिक मामलों पर उनका स्वदेशी विचार सामान्य जन से लेकर बुद्धिजीवियों तक को आज भी प्रभावित करता है । बाबा रामदेव ने उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें भारत स्वाभिमान (ट्रस्ट) के राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा था, जिस पद पर वे अपनी मृत्यु तक रहे । वे राजीव भाई के नाम से अधिक लोकप्रिय थे । पिछले 20 वर्षों में दीक्षित जी ने लगभग 15000 से अधिक व्याख्यान दिए। आज भारत में 5000 से अधिक विदेशी कम्पनियाँ व्यापार करके हमें लूट रही हैं, उनके खिलाफ राजीव भाई ने स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत की| देश में सबसे पहली स्वदेशी-विदेशी की सूची तैयार करके स्वदेशी अपनाने का आग्रह प्रस्तुत किया । 1995-96 में टिहरी बाँध के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में संघर्ष किया और पुलिस लाठी चार्ज में काफी चोटें खायीं । उसके बाद 1997 में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में प्रख्यात् इतिहासकार प्रो० धर्मपाल के सानिध्य में अँग्रेजों के समय के ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करके समूचे देश को आन्दोलित करने का काम किया । पिछले 10 वर्षों से स्वामी रामदेव के सम्पर्क में रहने के बाद 1 जनवरी 2001 को स्वामीजी के विशेष आग्रह पर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का पूर्ण उत्तरदायित्व अपने कन्धों पर सम्हाला । जिसका निर्वहन वो जीवन पर्यंत करते रहे ।

जय माँ भारती , वन्देमातरम् ... !

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