Tuesday, 27 November 2012

आज से बहुत साल पहले ...
जहां थी चारों ओर हरियाली और निस्तब्धता । 

आज न तो वहाँ कोई हरियाली है न तो कोई स्तब्धता
आज वहां सब कुछ बदल गया ...
आज वहाँ सिर्फ और सिर्फ ...
महल अपना सर उठाके खड़े है । 

इंसानी भीड़ में ...
अब वहाँ कोई हरियाली नज़र नहीं आती ।
आज तो वहाँ सभी अपने ...
दिखावे की जीवन का सामान कर रहे है । - लिली कर्मकार

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