Saturday, 1 September 2012

ये नाइंसाफी नहीं तो और क्या है ....???

आचार्य बालकृष्ण की गिरिफ्तारी .. और शाही इमाम बुखारी को आजादी क्यों …..???

आचार्य बालकृष्ण की डिग्री को फर्जी साबित करने बाली सरकार को सोनिया गाँधी की फर्जी डिग्री पर कार्यबाही से इनकार क्यों ....???


अतिथि देवो भव ... ये वाक्य सदियों से भारत के समाज का आदर्श रहा है लेकिन कांग्रेस ने इस बाक्य को हमेशा ही अपने कुत्सित राजनैतिक फायदे और वोट बैंक के लिये प्रयोग किया है …… जिसके एक नहीं अनेको उदाहरण है …… इस देश में करोडो बांग्लादेशी घुसपैठिये है जिनको कांग्रेस ने दामाद की तरह पाल रक्खा है और उनको भारत से निकालने और पहचान करने के सुप्रीम कोर्ट के अनेको आदेशो के बाद भी कोई प्रभावी कदम नहीं उठाये गए .......... दिल्ली के शाही इमाम मौलाना बुखारी के खिलाफ अदालत के सैकड़ों वारंट जारी है पर उनको गिरिफ्तार करने की हिम्मत सरकार में नहीं | मुम्बई पर हमला कर सैकड़ों बेगुनाहों को मौत की नींद सुलाने बाला कसाब फांसी की सजा के बाद भी बिरियानी खा रहा है ........ अबू जिंदाल नाम का मुम्बई हमले का गुनाहगार सुरक्षा एजेंसियों के कब्जे में आराम फरमा रहा है ...... ऐसे लोगो पर कार्यवाही करने में सरकार के हाँथ पैर कापते है पर ............... जो इंसान भारत की करोड़ो गरीव जनता के स्वास्थ के लिये अपना पूरा जीवन समर्पित कर देश सेवा कर रहा है उसके खिलाफ फर्जी सबूत इक्कठा कर गिरिफ्तार करने में सरकार दो पल का मौका भी नहीं छोडती .लेकिन कांग्रेस की मालकिन सोनिया गांधी की फर्जी डिग्रियों के मसले पर सरकार की चुप्पी क्यों .. क्या ये सच नहीं है की सोनिया की फर्जी डिग्रियों के मसले के उठने के उन्होंने अपनी शैक्षिक योग्यता पर अपने शब्द बापस ले कर दोहरा मापदंड अपनाया था .... क्यों नहीं सोनिया की शैक्षिक योग्यता की जांच की जाती ... अपनी डिग्रियों पर बयान बदलने बाली सोनिया के खिलाफ सरकार के आँख कान और दिमाग बंद क्यों ..|

आखिर हम किस समाज में रह रहे है , …… क्या इस देश के हित की बात सोचना और देश की जनता के स्वास्थ के लिये काम करना राष्ट्रद्रोह है ... क्या आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद के माध्यम से देश की जनता की सेवा कर कोई राष्ट्रद्रोह किया है .... क्या इस देश में समाज सेवा करना और भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को शिखर पर पहुँचाना गुनाह है .............???

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