Thursday, 30 August 2012

मुझे आज़ादी चाहिए . . .

खुद में छुपे अपनी कमजोरियों से . . .

सूरज के उजाले पर तो . . .

हर किसीका हक़ होता है . . . !

फिर मैं . . . ,

मुठ्ठी भर उजाले की इंतज़ार क्यों करू . . . !


मुझे आज़ादी चाहिए . . .

सपने पुरे करने की आज़ादी . . .

सपने देखने की आज़ादी . . . !

मुझे जीना है . . .

अपने सपनों को साकार करना है . . .


मुझे आज़ादी चाहिए . . .

इस झूठी शान से . . .

इस बनावटी समाज के रिवाजों से . . . !
 

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