Wednesday, 11 July 2012

 प्रत्येक कर्म (Action) का कर्म फल (Reaction) अवस्य होगा ...... 


इस परिवर्तनशील संसार में प्रति-क्षण अनेकों प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं॥ इस परिवर्तों में प्रत्येक ब्यक्ति और बस्तु आपना प्रभाव डालता भी है और उससे प्रभावित भी होता है॥ किसी भी जड़ अथवा चेतन की पूर्ण रीति अप्रभावित रहते या अप्रभावित करने की कल्पना ही नहीं की जा सकती क्योंकि सृष्टि का गठन ही पारस्परिक सम्बन्धता पर आधारित है॥ यह एक निर्विवाद नियम हे कि प्रत्येक कर्म (Action) का कर्म फल (Reaction) अवस्य होगा॥ कर्म फल कर्ता को भी प्रभावित करता है तो दूसरों को भी॥ यह भी बात निर्विवाद है कि मनुष्य जो भी कर्म करता है वो शुख, शान्ति और आनन्द कि प्राप्ति के लिए ही करता है॥ ऐसा एक मनुष्य में नहीं होगा जो दु:ख और अशान्ति 'पाने ' कि इच्छा से कर्म करता हो॥ इस प्रकार संसार के समस्त मनुष्य शुख और शान्ति पाने के लिए प्रयत्नशील हैं॥ परन्तु, कितनी अजीब बात है कि सुख और शान्ति पाने कि इच्छा से किये गये कर्मों द्वरा ही आज संसार में इतना अशान्ति छाई हुई है॥ प्रत्येक ब्यक्ति आज दु:खी और अशान्त है॥ शान्ति के बीच से अशान्ति का फल क्यों और कैसे निकाल रहा है?? यह एक पहली बन गई है, जिसे सुलझाना है॥ 

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