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Wednesday, 11 September 2013

रिश्तों का सच !!



रिश्ते जोड़ कर कोई मरता है तो कोई किसी को मरते हुये देख कर हँसता है | आजकल यह बहुत आम बात हो चुकी है फिर भी कई लोग हर रिश्ते को आम तरीके से नहीं लेते | हमे किसी के साथ झूठ बोल कर रिश्ता नहीं बनाना चाहिए | कोई अगर हमे पसंद है तब उसको हमे अपने बारे में सब सच बोल कर रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहिए | कई लोग ऐसे होते है जो अपने स्वार्थ के कारण दूसरे की भावनाओं के साथ खेलते है वो चाहे वास्तविक जीवन में हो या सोश्ल मीडिया में | मुझे अक्सर ऐसे Massages मिलते रहते है जो लोग रिश्ते टूटने से अवसाद (Depression) में जा चुके है | जिन लोगों से झूठ बोल कर रिश्ता जुड़ा गया है और सच पता चलने पर वो उसे हजम नहीं कर पाये |

मैं यहाँ पर एक बात बोलुंगी हर कोई दिलों-दिमाग से बहुत ज़्यादा सक्ख नहीं होता है | कभी कभी लोग रिश्ते को ले कर इतना अधिकारात्मक हो जाते है की जब उन्हें झूठ का पता चल जाता है तब वो स्वयं को सम्हाल नहीं पाते और दिलों-दिमाग से टूट जाते है | जो लोग बहुत ज़्यादा संवेदनशील हैं उन लोगों के जीवन पर इसका असर बहुत बुरी तरह से पड़ता है कहीं न कहीं वो इंसान अपने जीवन को बहुत नकारात्मक बना लेते है | और मैंने अच्छे अच्छे इंसान को नशा कर के अपने जीवन को बरवाद करते हुये भी देखा है ऐसे विषय पर | कृपया कोई भी किसी की भावनाओं के साथ ना खेले, हद्द तो तब होती है जब हम किसी के ऊपर विश्वास करते है और सामने वाला इंसान हमारे विश्वास का खुलेआम दूसरे सामने मज़ाक बनाता है | एक तो इंसान किसी के भावनाओं के साथ खेल कर बहुत बड़ी गलती करता है, और दूसरा उस व्यक्ति की व्यक्तिगत बातें दूसरे को बोल कर उसके इज्ज़त के साथ भी खेलते है यह तो खुलेआम गुनाह हुया | किसी की व्यक्तिगत विषय को पब्लिक करना यह क्राइम है जिसकी कानूनी सज़ा भी बहुत बढ़ी होती है | खैर किसी की जीवन खराब करने से पहले बहुत बार सोचे, कहीं मस्ती-मज़ाक में या आपके घटिया शौक के चलते कहीं आपका जीवन ही सलाखों के पीछे ना चला जायें |